मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 - 18:49
अमेरिकी सैन्य ठिकानों से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा। ईरानी राष्ट्रपति

हौज़ा / ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़ेश्कियान ने कहा है कि वाशिंगटन की “हस्तक्षेपवादी और विभाजनकारी नीतियों” ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों की मौजूदगी अस्थिरता और असुरक्षा को बढ़ाती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़ेश्कियान ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बैठक के दौरान ये टिप्पणियां कीं। लावरोव एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए नवीनतम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बातचीत करने के लिए तेहरान पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा,हमारा मानना है कि क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों की मौजूदगी से इस क्षेत्र को न तो पहले कोई लाभ हुआ है और न ही भविष्य में होगा। इसके बजाय, ये अड्डे केवल तनाव बढ़ाने, विभाजन को गहरा करने तथा अस्थिरता और असुरक्षा को बढ़ावा देने का काम करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी क्रांति के नेता, सैन्य कमांडरों, वैज्ञानिकों और स्कूली बच्चों की शहादत के साथ-साथ हाल ही में अमेरिका और इस्राईल द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ की गई आक्रामक कार्रवाई के दौरान देश के बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानदंडों का उल्लंघन किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये हमले उस समय किए गए, जब ईरान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान तलाश रहा था।

पिज़ेश्कियान ने कहा,इस्लामी गणराज्य ईरान इस बात को स्वीकार नहीं करता कि कोई भी देश अपनी शक्ति और दबाव के साधनों के बल पर दूसरे देशों पर अपनी इच्छा और मांगें थोपे। हम ऐसी दुनिया चाहते हैं, जो आपसी सम्मान, राष्ट्रों के अधिकारों के पालन, रचनात्मक सहयोग और बहुपक्षवाद पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि ईरान और रूस इन सिद्धांतों पर समान विचार रखते हैं।

अमेरिका और इस्राईल ने 28 फरवरी को संयुक्त रूप से ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य आक्रामक कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान ईरान के शीर्ष अधिकारियों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिनमें सड़कें, पुल और रेलवे लाइनें भी शामिल थीं। इसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इस्राईली ठिकानों पर शक्तिशाली जवाबी हमले किए, जिससे आक्रमणकारी गठबंधन को भारी नुक़सान पहुंचा।

यह युद्ध 40 दिनों के बाद युद्ध-विराम के साथ थम गया। इसके बाद जून के मध्य में ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ युद्ध-विराम को औपचारिक रूप दिया गया।

ईरानी राष्ट्रपति ने हालिया अमेरिका-इस्राईल युद्ध के दौरान समर्थन देने के लिए रूस के राष्ट्रपति, सरकार और जनता का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने तेहरान और मॉस्को के साझा हितों के अनुरूप आपसी समर्थन जारी रखने तथा राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग को और मज़बूत बनाने पर ज़ोर दिया।

पिज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान क्षेत्रीय देशों के साथ शांति और सुरक्षा, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक सहयोग तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए किसी भी संयुक्त पहल और तंत्र का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि, ईरान का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा की नींव आपसी विश्वास, क्षेत्रीय देशों की भागीदारी और सभी पक्षों के वैध हितों के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए।

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